जद (यू) पार्टी से
राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी बिहार की राजनीति में मुस्लिम चेहरों में पहली
पंक्तियों में गिने जाते हैं. छात्र जीवन से ही विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर संघर्षशील
रहे अली अनवर साहब बिहार में मुस्लिम पासमांदा
आंदोलन के जाने-पहचाने चेहरा हैं. उनसे बिहार के मौजूदा घटनाक्रम पर ज़ीशान से बातचीत बात के कुछ अंश.
सवाल: डीमोनीटाइजेशन को
लेकर जद (यू) ही एक ऐसी पार्टी थी, जिसने खुलकर मोदी का समर्थन किया. इसके पीछे
पार्टी की क्या सोच है ?
जवाब: नीतीश कुमार ने
इसका ज़रूर समर्थन किया लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसे बिना पूर्व तैयारी के लागू
कर दिया गया. जिसकी वजह से आमलोगों को परेशानियां हो रही हैं. उन्होंने कहा था कि
यह काला धन के खिलाफ एक कदम हो सकता है लेकिन यही काफी नही है. मगर व्यक्तिगत से
मेरा मानना है कि मोदी जी की नीयत ही ठीक नहीं है. इस फैसले से बारह के करीब बैंक
कर्मी मारे गये, लगभग सौ के करीब आम जनता की मौत हो गयी. बड़ी मछली तो कोई हाथ में
नहीं आई लेकिन आमलोगों का जीना बेहाल हो गया. लेकिन जद (यू) पार्टी केंद्र सरकार
द्वारा उठायें गए इस कदम को लेकर समीक्षा कर रही है.
सवाल: ऐसी कयास लगाई जा
रही है कि डीमोनीटाइजेशन का समर्थन कर नीतीश ने स्वयं का ऑप्शन खुला है.
जवाब: ऐसी कोई बात नहीं
है. हम सभी हमेशा कालेधन के खिलाफ रहे है अगर आज कोई ऐसा कदम उठा है तो हम उसे
एकदम से दरकिनार नहीं कर सकते. बीजेपी से नजदीकी की बात हमारे विरोधी दल प्रचारित
कर रहे हैं, वह हमारे गठबंधन में झगड़ा लगाना चाहते हैं.
सवाल: 350 वें प्रकाशोत्सव
के अवसर पर नीतीश द्वारा आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साथ मंच नहीं शेयर
किये जाने के पीछे क्या तथ्य है.
जवाब: देखिये.. यह कोई
पोलिटिकल फंक्शन नहीं था यह सिख गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव समागम था.
यहाँ स्टेज किसी को दिए और न दिए जाने की कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए. ये संघीय
व्यस्था है, हर चीज का एक प्रोटोकॉल होता है. आने वाले कल में हो सकता है राज्य या
केंद्र में कोई दूसरी पार्टी होगी. किसी दिन नीतीश जी भी प्रधानमंत्री हो सकते
हैं, मोदी जी भी फिर से मुख्यमंत्री हो सकते हैं. लेकिन जो प्रोटोकॉल है उसे तो
फॉलो करना पड़ेगा.
सवाल: सेक्युलर या
समाजवादी विचार रखने वाली राजनीति पार्टियाँ यू.पी इलेक्शन को लेकर एकजुट क्यों
नहीं हो पा रहे हैं ?
जवाब: हमारी पार्टी ने तो
कोशिश की थी मुलायम सिंह यादव को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष तक बनाया था. उनका
झंडा-चुनाव चिन्ह तक हम लेने के लिए तैयार थे. लेकिन वो खुद भाग खड़े हुए और
हमलोगों को हराने के लिए अपने कैंडिडेट खड़े किये. अब हमलोग पर यह आरोप नहीं लगना
चाहिए कि हमलोगों ने कोशिश नहीं की, हमलोगों ने कोशिश तो की लेकिन सफलता नहीं
मिली.
सवाल: ओवैसी अब अपनी
पार्टी का बैनर को लेकर बिहार के बाद यू.पी में भी उतर रहे हैं.
जवाब: हम तो चाहेंगे कि
बिहार के लोगों ने जिस तरह की समझदारी दिखाई, उसी तरह की समझदारी यू.पी. के लोगों
को भी दिखाने की जरुरत है. टीवी पर डिबेट के दौरान मेरा कई दफा ओवैसी के साथ सामना
हुआ तो हमने कहा आप टोपी ज़रूर पहनिये, शेरवानी ज़रूर पहनिए लेकिन ज़िन्ना के रस्ते
पर मत जाइये.
सवाल: मुस्लिम पासमांदा
आंदोलन को वर्तमान में आप कहा देखते हैं.
जवाब: पासमांदा आंदोलन की
जरुरत तब तक है जबतक की समाज में भेदभाव, ऊँच-नीच और बड़े-छोटे की व्यस्था समाज बनी
है. ये सामंती व्यस्था सिर्फ हिन्दुओं में नहीं है बल्कि सामान रूप से मुसलमानों
में भी है, जिसे अशरफिया निज़ाम कहते है जिसे एक जात नहीं कहा जा सकता जबकि यह एक
माइंडसेट है और जब तक यह माइंडसेट या ज़हनियत है उसके लिए हमलोगों को लड़ाई लड़नी
पड़ेगी.
सवाल: मुस्लिम पासमांदा
समाज इसे लेकर कितना जागरूक है?
जवाब: साम्प्रदायिकत और
सामंतवाद के सवाल पर आज पूरा समाज दुविधा में है ख़ासकर पिछड़ा और अल्पसंख्यक.
हमलोगों को दोहरी लड़ाई लड़नी है. हिंदू सामंती सोच रखने वालों से भी और मुस्लिम
सामंती सोच रखने वालों से भी. अभी हाल में ही हमलोगों ने अलीगढ़ में इसे लेकर सफल
सम्मलेन की और हमें ख़ुशी है कि जो पसमांदा मुस्लिम समाज को लेकर जो सपना या नक्सा
मेरे दिमाग में था उसे सौ प्रतिशत रूप से साकार होते देखा. विभिन्न जगहों से आये
पासमांदा समाज के लोगों ने अपनी बात रखी. अब हमरी बात यूनिवर्सिटी कैंपसो, चौक
चौराहों और आवाम के बीच की जा रही है जिस निश्चित ही कोई सफलता मिलेगा.

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